ऋग्वेद | Rigved

ऋग्वेद | Rigved

[su_box title=”ऋग्वेद | Rigved ” box_color=”#292370″ radius=”4″]

[su_table responsive=”yes”]

किताब का नाम/Name of Book :

ऋग्वेद | Rigved

लेखक/Author of Book: दयानंद सरस्वती – Dayanand Saraswati
भाषा/Language of Book : हिन्दी | Hindi
पेज/Total pages in ebook: 985
साइज/Size of Ebook: 20.15 MB
श्रेणी: धार्मिक / Religious,

[/su_table]

द १६: होते । संहिताओं के पद पाठ बहुत उपयोगी हैं । पदपाठ का निर्धारण भी एक विद्या है। उदाहरण के लिए ‘मेहना’ पद को लिया जा सकता है। ऋग्वेद ५1 ३६1 है और’ सामवेद ४, २1 १। ‘४ में यह पद पाथा जाता है । यास्क ने दानार्यक “मंह’ घातु से इसे एक पद मानकर इसका अर्चें “मंहनीय’ किया है । परन्तु यास्क ने ही इसमें तीन सदों का संपोग एक पद माना है । वे हैं मेज-इह–न जिनका अर्थ है कि “जो मेरे पास इस लोक में नहीं है। इसी प्रकार ऋग्देद १० ! £1 १ में ‘वादो’ पद आया है 1 यास्क ने इसकी व्याख्या करते हुए पदकार शाक्त्य को आलोचना की है

[su_button url=”https://archive.org/download/in.ernet.dli.2015.402398″ target=”blank” background=”#f22222″ size=”6″ wide=”yes”]Click here To Download[/su_button]

[su_button url=”#” target=”blank” background=”#292370″ size=”6″ wide=”yes”]View On Amazon[/su_button]

[su_button url=”https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.402398″ target=”blank” background=”#fdbb16″ size=”6″ wide=”yes”]Read Online[/su_button]

[su_button url=”https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.402398″ target=”blank” background=”#1405cd” size=”6″ wide=”yes”]View eBook Source[/su_button]

[/su_box]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *