प्राचीन भारत का इतिहास – डॉ. गिरिजा शंकर | Prachin Bharat Ka Itihas

प्राचीन भारत का इतिहास – डॉ. गिरिजा शंकर | Prachin Bharat Ka Itihas

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किताब का नाम/Name of Book :

प्राचीन भारत का इतिहास | Prachin Bharat Ka Itihas

लेखक/Author of Book: डॉ. गिरिजा शंकर – Dr Girija Shankar
भाषा/Language of Book : हिन्दी
पेज/Total pages in ebook: 348
साइज/Size of Ebook: 19 MB
श्रेणी: इतिहास

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इतिहास शब्द ‘इति’ ‘ह’ तथा ‘आस’ इन तीन शब्दों से मिलकर बना हुआ शब्द है जिसका अर्थ है ऐसा निश्चित रूप से हुआ यह स्पष्ट है कि इतिहास पूर्वजों का अध्ययन करता है इस अध्ययन के अंतर्गत वह उसके विविध प्रकार के कार्यकलापों उसके द्वारा निर्मित विविध राजनीतिक एवं सामाजिक संस्थाओं तथा उसकी विविध मान्यताओं की चर्चा करता है इतिहासकार को अतीत प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त नहीं होता आपकी दो अतीत के विषय में उसे कुछ साक्ष्य प्राप्त होते हैं जिनके आधार पर वह अतीत का निर्माण करता है इस साक्ष्य जिनके आधार पर इतिहास लिखा गया या जाना गया हमें सरलता से प्राप्त नहीं हुआ इसलिए कुछ समय पूर्व तक विदेशी विद्वानों की थी कि भारतीयों का कोई इतिहास ही नहीं है यह विचारधारा पश्चात इतिहासकारों की शायद इसलिए है कि प्राचीन भारतीयों का दृष्टिकोण अध्यात्मिक प्रधान था वास्तव में यदि तिथि क्रम के प्रश्न को पृथक कर दिया जाए तो यह निश्चित रूप से स्पष्ट हो जाएगा कि प्राचीन इतिहासकारों में इतिहास बुद्धि का अभाव था अपितु यह प्रमाणित होगा कि भारत के प्राचीन ग्रंथों में बहुमूल्य ऐतिहासिक सामग्री नथ है जिसे विविध रूपों में प्राप्त किया जा सकता है इस साक्ष्य विविध रूपों में होते हैं-यथा साहित्यिक रचनाएं अथवा दस्तावेज, स्मारक, सिक्के, लेख इत्यादि इन सामग्रियों को आधार बनाकर इतिहासकार अतीत में जो कुछ घटित हुआ उसको एक सरलता से ग्रहण करने योग्य रूप में प्रस्तुत करने की चेष्टा करता है इतिहासकार साक्ष्यों को अत्यंत पवित्र मानता है और अपने प्रत्येक मत एवं कथन के समर्थन में वह किसी न किसी साथ का हवाला देता है इतिहासकार कभी भी केवल कल्पना के आधार पर कोई बात नहीं कहता ईश्वर का इतिहास में पक्षियों का महत्व ऐसा ही होता है जैसा की अदालत में अपनी बात के समर्थन में वकील द्वारा दिए गए सबूतों का….

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