सेवासदन | Sevasadan

सेवासदन | Sevasadan

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किताब का नाम/Name of Book :

सेवासदन | Sevasadan

लेखक/Author of Book: प्रेमचंद – Premchand
भाषा/Language of Book : हिन्दी | Hindi
पेज/Total pages in ebook: 300
साइज/Size of Ebook: 11.5 MB
श्रेणी: उपन्यास / Upnyas-Novel

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एक महीना बीत चुका था । कल तिलक जानें की साइत थी । भव्य हि दारोगा जी संध्या समय थाने में मसनद लगाये बैठे थे उस समय सामने से सुपरिन्टेन्डेन्ट पुलिस आता हुआ दिखाई दिया । उसके पीछे दो थानेदार और कई कान्सटेवल चल आ रहे थे । कृष्णचन्द्र उन्हें देखते ही घबरा कर उठे कि एक थानेदार ने बढ़ कर उन्हें गिरफ्तारी का वारण्ट दिखाया । कृष्णचन्द्र का मुख पीला पड़ गया 1 वह जडमूर्ति की भाति चुपचाप खड़े हो गए और सिर झुका लिया । उनके चेहरे पर भय न था लज्जा थी । यह वही दोनो थानेदार थे जिनके सामसे वह अभिमान से सिर उठा कर चलते थे जिन्हे वह नौच समभतें थे । पर आज उन्हीं के सामने वह सिर नीचा किये खडे थे 

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